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Roll Number 5359: एशिया के सबसे पुराने बिशप कॉटन स्कूल शिमला से वीरभद्र सिंह ने की थी पढ़ाई

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शिमला. हिमाचल प्रदेश के लोकप्रिय नेता और छह बार के सीएम वीरभद्र सिंह (Virbhadra Singh) कभी नेता नहीं बनना चाहते थे. वह दिल्ली विश्वविद्यालय में हिस्ट्री के प्रोफेसर बनना चाहते थे. लेकिन इंदिरा गांधी के कहने पर वह राजनीति में उतरे. वीरभद्र सिंह ने अपनी शुरुआती पढ़ाई शिमला के रामपुर और बाद में शिमला के सबसे पुराने स्कूल बिशप कॉटन स्कूल (‌बीसीएस) की. यह स्कूल एशिया के सबसे पुराना स्कूल है.

किसी आम विद्यार्थी की तरह वीरभद्र भी स्कूल में पढ़ाई करते थे. आज भी रजिस्टर में उनका रोलनंबर दर्ज है. रजिस्टर में 5359 रोल नंबर के सामने वीरभद्र सिंह का नाम लिखा हुआ है. शिमला के बिशप कॉटन स्कूल से पढ़ाई करने के बाद वीरभद्र सिंह ने दिल्ली के सेंट स्टीफन्स कॉलेज से बीए ऑनर्स की पढ़ाई की. वीरभद्र सिंह हिस्ट्री के प्रोफेसर बनना चाहते थे.

शिमला का बिशप कॉटन स्कूल (फोटो साभार-सोशल मीडिया).

कब बना था ये स्कूल
शिमला का बिशप कॉटन स्कूल एशिया का सबसे पुराना स्कूल है. 28 जुलाई, 1859 को इसकी स्थापना हुई थी. साल 1905 में स्कूल की बिल्डिंग में आग लग गई. इसके बाद साल 1907 में इसे फिर से बनाया गया. स्कूल कई ऐतिहासिक धरोहरों को समेटे हुए है. साल 1914 में हुए विश्व युद्ध के शहीदों के नाम भी इस स्कूल में सुरक्षित रखे गए हैं. 1922 में स्कूल में इंफ्लुएंजा फैला था. हेड मिस्ट्रेस की मौत हो गई. 22 अक्टूबर 1947 को भारत-पाक विभाजन के समय स्कूल के दरवाजे बंद कर दिए गए थे. इस समय यहां पाकिस्तान के 42 छात्र पढ़ाई कर रहे थे, लेकिन विभाजन की वजह से इन विद्यार्थियों को स्कूल छोड़ना पड़ा था. अंतिम दिन इरविन हॉल में हुई स्पीच में छात्रों को यह जानकारी दी गई कि विभाजन की वजह से पाकिस्तान के छात्रों को स्कूल छोड़ कर जाना होगा. साल 1947 से लेकर साल 2009 तक विद्यालय के इरविन हॉल को बंद रखा गया. साल 2009 में इरविन हॉल के दरवाजे जब खोले गए, तब 62 साल पहले स्कूल छोड़कर जाने वाले छात्रों को भी इस में आमंत्रित किया गया था. यह लोग कालका-शिमला टॉय ट्रेन में सवार होकर स्कूल पहुंचे थे.

कौन-कौन यहां से पढ़े
वीरभद्र सिंह के अलावा, प्रसिद्ध लेखक रसकिन बॉन्ड यहां से पड़े हैं. इसके अलावा, ब्रिटिश आर्मी के अफसर मेजर रॉय फैरन इसी स्कूल के एलुम्नी हैं. इसके अलावा, जलियांवाला हत्यांकांड के जिम्मेदार जनरल डायर ने भी इसी स्कूल से पढ़ाई की थी.

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